॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.5.35
एवं युगानुरूपाभ्यां भगवान् युगवर्तिभिः।
मनुजैरिज्यते राजन् श्रेयसामीश्वरो हरिः॥ ३५
evaṃ yugānurūpābhyāṃ bhagavān yugavartibhiḥ|
manujairijyate rājan śreyasāmīśvaro hariḥ|| 35
अर्थ
राजन्! इस प्रकार विभिन्न युगोंके लोग अपने-अपने युगके अनुरूप नाम-रूपोंद्वारा विभिन्न प्रकारसे भगवान्की आराधना करते हैं। इसमें सन्देह नहीं कि धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष—सभी पुरुषार्थोंके एकमात्र स्वामी भगवान् श्रीहरि ही हैं॥ ३५॥✎ 1736