॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.5.27
द्वापरे भगवाञ्छ्यामः पीतवासा निजायुधः।
श्रीवत्सादिभिरंकैश्च लक्षणैरुपलक्षितः॥ २७
dvāpare bhagavāñchyāmaḥ pītavāsā nijāyudhaḥ|
śrīvatsādibhiraṃkaiśca lakṣaṇairupalakṣitaḥ|| 27
अर्थ
राजन्! द्वापरयुगमें भगवान्के श्रीविग्रहका रंग होता है साँवला। वे पीताम्बर तथा शंख, चक्र, गदा आदि अपने आयुध धारण करते हैं। वक्षः-स्थलपर श्रीवत्सका चिह्न, भृगुलता, कौस्तुभमणि आदि लक्षणोंसे वे पहचाने जाते हैं॥ २७॥