श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.5.21

एकादश स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

कृते शुक्लश्‍चतुर्बाहुर्जटिलो वल्कलाम्बरः।

कृष्णाजिनोपवीताक्षान् बिभ्रद् दण्डकमण्डलू॥ २१

kṛte śuklaścaturbāhurjaṭilo valkalāmbaraḥ|

kṛṣṇājinopavītākṣān bibhrad daṇḍakamaṇḍalū|| 21

अर्थ

सत्ययुगमें भगवान्‌के श्रीविग्रहका रंग होता है श्‍वेत। उनके चार भुजाएँ और सिरपर जटा होती है तथा वे वल्कलका ही वस्त्र पहनते हैं। काले मृगका चर्म, यज्ञोपवीत, रुद्राक्षकी माला, दण्ड और कमण्डलु धारण करते हैं॥ २१॥

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