॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.4.7
इन्द्रो विशङ्क्य मम धाम जिघृक्षतीति
कामं न्ययुङ्क्त सगणं स बदर्युपाख्यम्।
गत्वाप्सरोगणवसन्तसुमन्दवातैः
स्त्रीप्रेक्षणेषुभिरविध्यदतन्महिज्ञः॥ ७
indro viśaṅkya mama dhāma jighṛkṣatīti
kāmaṃ nyayuṅkta sagaṇaṃ sa badaryupākhyam|
gatvāpsarogaṇavasantasumandavātaiḥ
strīprekṣaṇeṣubhiravidhyadatanmahijñaḥ|| 7
अर्थ
ये अपनी घोर तपस्याके द्वारा मेरा धाम छीनना चाहते हैं—इन्द्रने ऐसी आशंका करके स्त्री, वसन्त आदि दल-बलके साथ कामदेवको उनकी तपस्यामें विघ्न डालनेके लिये भेजा। कामदेवको भगवान्की महिमाका ज्ञान न था; इसलिये वह अप्सरागण, वसन्त तथा मन्द-सुगन्ध वायुके साथ बदरिकाश्रममें जाकर स्त्रियोंके कटाक्ष बाणोंसे उन्हें घायल करनेकी चेष्टा करने लगा॥ ७॥✎ 1727