वहाँ पहुँचकर उन्होंने इन्द्रको नमस्कार किया तथा भरी सभामें देवताओंके सामने भगवान् नर-नारायणके बल और प्रभावका वर्णन किया। उसे सुनकर देवराज इन्द्र अत्यन्त भयभीत और चकित हो गये॥ १६॥✎ 1728
इन्द्रायानम्य सदसि शृण्वतां त्रिदिवौकसाम्।
ऊचुर्नारायणबलं शक्रस्तत्रास विस्मितः॥ १६
वहाँ पहुँचकर उन्होंने इन्द्रको नमस्कार किया तथा भरी सभामें देवताओंके सामने भगवान् नर-नारायणके बल और प्रभावका वर्णन किया। उसे सुनकर देवराज इन्द्र अत्यन्त भयभीत और चकित हो गये॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.4.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 735) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/4/16/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)