॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.4.1
अथ चतुर्थोऽध्यायः
भगवान्के अवतारोंका वर्णन
राजोवाच
यानि यानीह कर्माणि यैर्यैः स्वच्छन्दजन्मभिः।
चक्रे करोति कर्ता वा हरिस्तानि ब्रुवन्तु नः॥ १
yāni yānīha karmāṇi yairyaiḥ svacchandajanmabhiḥ|
cakre karoti kartā vā haristāni bruvantu naḥ|| 1
अर्थ
राजा निमिने पूछा—योगीश्वरो! भगवान् स्वतन्त्रतासे अपने भक्तोंकी भक्तिके वश होकर अनेकों प्रकारके अवतार ग्रहण करते हैं और अनेकों लीलाएँ करते हैं। आपलोग कृपा करके भगवान्की उन लीलाओंका वर्णन कीजिये, जो वे अबतक कर चुके हैं, कर रहे हैं या करेंगे॥ १॥