श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.30.14

एकादश स्कन्ध · अध्याय 30 · अथ त्रिंशोऽध्यायः

युयुधुः क्रोधसंरब्धा वेलायामाततायिनः।

धनुर्भिरसिभिर्भल्लैर्गदाभिस्तोमरर्ष्टिभिः॥ १४

yuyudhuḥ krodhasaṃrabdhā velāyāmātatāyinaḥ|

dhanurbhirasibhirbhallairgadābhistomararṣṭibhiḥ|| 14

अर्थ

उस समय वे क्रोधसे भरकर एक-दूसरेपर आक्रमण करने लगे और धनुष-बाण, तलवार, भाले, गदा, तोमर और ऋष्टि आदि अस्त्र-शस्त्रोंसे वहाँ समुद्रतटपर ही एक-दूसरेसे भिड़ गये॥ १४॥

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