श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.3.44

एकादश स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

परोक्षवादो वेदोऽयं बालानामनुशासनम्।

कर्ममोक्षाय कर्माणि विधत्ते ह्यगदं यथा॥ ४४

parokṣavādo vedo'yaṃ bālānāmanuśāsanam|

karmamokṣāya karmāṇi vidhatte hyagadaṃ yathā|| 44

अर्थ

यह वेद परोक्षवादात्मक* है। यह कर्मोंकी निवृत्तिके लिये कर्मका विधान करता है, जैसे बालकको मिठाई आदिका लालच देकर औषध खिलाते हैं, वैसे ही यह अनभिज्ञोंको स्वर्ग आदिका प्रलोभन देकर श्रेष्ठ कर्ममें प्रवृत्त करता है॥ ४४॥

टिप्पणियाँ

  1. *

    जिसमें शब्दार्थ कुछ और मालूम दे और तात्पर्यार्थ कुछ और हो—उसे परोक्षवाद कहते हैं।

    (मुद्रित पृष्ठ 730)

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