यह सृष्टि, स्थिति और संहार करनेवाली त्रिगुणमयी माया है। इसका हमने आपसे वर्णन किया। अब आप और क्या सुनना चाहते हैं?॥ १६॥
एषा माया भगवतः सर्गस्थित्यन्तकारिणी।
त्रिवर्णा वर्णितास्माभिः किं भूयः श्रोतुमिच्छसि॥ १६
यह सृष्टि, स्थिति और संहार करनेवाली त्रिगुणमयी माया है। इसका हमने आपसे वर्णन किया। अब आप और क्या सुनना चाहते हैं?॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.3.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 724) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/3/16/