श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.3.16

एकादश स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

एषा माया भगवतः सर्गस्थित्यन्तकारिणी।

त्रिवर्णा वर्णितास्माभिः किं भूयः श्रोतुमिच्छसि॥ १६

eṣā māyā bhagavataḥ sargasthityantakāriṇī|

trivarṇā varṇitāsmābhiḥ kiṃ bhūyaḥ śrotumicchasi|| 16

अर्थ

यह सृष्टि, स्थिति और संहार करनेवाली त्रिगुणमयी माया है। इसका हमने आपसे वर्णन किया। अब आप और क्या सुनना चाहते हैं?॥ १६॥

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