श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.29.28

एकादश स्कन्ध · अध्याय 29 · अथैकोनत्रिंशोऽध्यायः

य एतच्छ्रद्धया नित्यमव्यग्रः शृणुयान्‍नरः।

मयि भक्तिं परां कुर्वन् कर्मभिर्न स बध्यते॥ २८

ya etacchraddhayā nityamavyagraḥ śṛṇuyānnaraḥ|

mayi bhaktiṃ parāṃ kurvan karmabhirna sa badhyate|| 28

अर्थ

जो कोई एकाग्र चित्तसे इसे श्रद्धापूर्वक नित्य सुनेगा, उसे मेरी पराभक्ति प्राप्त होगी और वह कर्मबन्धनसे मुक्त हो जायगा॥ २८॥

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