भगवान् श्रीकृष्णने कहा—वस्तुतः प्रिय उद्धव! संसारका अस्तित्व नहीं है तथापि जबतक देह, इन्द्रिय और प्राणोंके साथ आत्माकी सम्बन्ध-भ्रान्ति है तबतक अविवेकी पुरुषको वह सत्य-सा स्फुरित होता है॥ १२॥
यावद् देहेन्द्रियप्राणैरात्मनः सन्निकर्षणम्।
संसारः फलवांस्तावदपार्थोऽप्यविवेकिनः॥ १२
भगवान् श्रीकृष्णने कहा—वस्तुतः प्रिय उद्धव! संसारका अस्तित्व नहीं है तथापि जबतक देह, इन्द्रिय और प्राणोंके साथ आत्माकी सम्बन्ध-भ्रान्ति है तबतक अविवेकी पुरुषको वह सत्य-सा स्फुरित होता है॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.28.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 884) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/28/12/