karmaṇāṃ bhāginaḥ pretya bhūyo bhūyasi tat phalam|| 55
अर्थ
जो लोग ऐसे कामोंमें सहायता, प्रेरणा अथवा अनुमोदन करते हैं, वे भी मरनेके बाद प्राप्त करनेवालेके समान ही फलके भागीदार होते हैं। यदि उनका हाथ अधिक रहा तो फल भी उन्हें अधिक ही मिलता है॥ ५५॥✎ 1769
कर्तुश्च सारथेर्हेतोरनुमोदितुरेव च।
कर्मणां भागिनः प्रेत्य भूयो भूयसि तत् फलम्॥ ५५
जो लोग ऐसे कामोंमें सहायता, प्रेरणा अथवा अनुमोदन करते हैं, वे भी मरनेके बाद प्राप्त करनेवालेके समान ही फलके भागीदार होते हैं। यदि उनका हाथ अधिक रहा तो फल भी उन्हें अधिक ही मिलता है॥ ५५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.27.55 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 882) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/27/55/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)