॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.27.38
तप्तजाम्बूनदप्रख्यं शंखचक्रगदाम्बुजैः।
लसच्चतुर्भुजं शान्तं पद्मकिंजल्कवाससम्॥ ३८
taptajāmbūnadaprakhyaṃ śaṃkhacakragadāmbujaiḥ|
lasaccaturbhujaṃ śāntaṃ padmakiṃjalkavāsasam|| 38
अर्थ
‘मेरी मूर्ति तपाये हुए सोनेके समान दम-दम दमक रही है। रोम-रोमसे शान्तिकी वर्षा हो रही है। लंबी और विशाल चार भुजाएँ शोभायमान हैं। उनमें शंख, चक्र, गदा, पद्म विराजमान हैं। कमलकी केसरके समान पीला-पीला वस्त्र फहरा रहा है॥ ३८॥