श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.27.36

एकादश स्कन्ध · अध्याय 27 · अथ सप्तविंशोऽध्यायः

विधिना विहिते कुण्डे मेखलागर्तवेदिभिः।

अग्‍निमाधाय परितः समूहेत् पाणिनोदितम्॥ ३६

vidhinā vihite kuṇḍe mekhalāgartavedibhiḥ|

agnimādhāya paritaḥ samūhet pāṇinoditam|| 36

अर्थ

उद्धवजी! तदनन्तर पूजाके बाद शास्त्रोक्त विधिसे बने हुए कुण्डमें अग्‍निकी स्थापना करे। वह कुण्ड मेखला, गर्त और वेदीसे शोभायमान हो। उसमें हाथकी हवासे अग्‍नि प्रज्वलित करके उसका परिसमूहन करे, अर्थात् उसे एकत्र कर दे॥ ३६॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें