श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.27.15

एकादश स्कन्ध · अध्याय 27 · अथ सप्तविंशोऽध्यायः

द्रव्यैः प्रसिद्धैर्मद्यागः प्रतिमादिष्वमायिनः।

भक्तस्य च यथालब्धैर्हृदि भावेन चैव हि॥ १५

dravyaiḥ prasiddhairmadyāgaḥ pratimādiṣvamāyinaḥ|

bhaktasya ca yathālabdhairhṛdi bhāvena caiva hi|| 15

अर्थ

प्रसिद्ध-प्रसिद्ध पदार्थोंसे प्रतिमा आदिमें मेरी पूजा की जाती है, परन्तु जो निष्काम भक्त है, वह अनायास प्राप्त पदार्थोंसे और भावनामात्रसे ही हृदयमें मेरी पूजा कर ले॥ १५॥

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