श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.27.13

एकादश स्कन्ध · अध्याय 27 · अथ सप्तविंशोऽध्यायः

चलाचलेति द्विविधा प्रतिष्ठा जीवमन्दिरम्।

उद्वासावाहने न स्तः स्थिरायामुद्धवार्चने॥ १३

calācaleti dvividhā pratiṣṭhā jīvamandiram|

udvāsāvāhane na staḥ sthirāyāmuddhavārcane|| 13

अर्थ

चल और अचल भेदसे दो प्रकारकी प्रतिमा ही मुझ भगवान्‌का मन्दिर है। उद्धवजी! अचल प्रतिमाके पूजनमें प्रतिदिन आवाहन और विसर्जन नहीं करना चाहिये॥ १३॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें