श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.27.10

एकादश स्कन्ध · अध्याय 27 · अथ सप्तविंशोऽध्यायः

पूर्वं स्नानं प्रकुर्वीत धौतदन्तोऽङ्गशुद्धये।

उभयैरपि च स्नानं मन्त्रैर्मृद्ग्रहणादिना॥ १०

pūrvaṃ snānaṃ prakurvīta dhautadanto'ṅgaśuddhaye|

ubhayairapi ca snānaṃ mantrairmṛdgrahaṇādinā|| 10

अर्थ

उपासकको चाहिये कि प्रातःकाल दतुअन करके पहले शरीरशुद्धिके लिये स्नान करे और फिर वैदिक और तान्त्रिक दोनों प्रकारके मन्त्रोंसे मिट्टी और भस्म आदिका लेप करके पुनः स्नान करे॥ १०॥

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