उद्धवजी! पहले तो परम यशस्वी सम्राट् इलानन्दन पुरूरवा उर्वशीके विरहसे अत्यन्त बेसुध हो गया था। पीछे शोक हट जानेपर उसे बड़ा वैराग्य हुआ और तब उसने यह गाथा गायी॥ ४॥
ऐलः सम्राडिमां गाथामगायत बृहच्छ्रवाः।
उर्वशीविरहान् मुह्यन् निर्विण्णः शोकसंयमे॥ ४
उद्धवजी! पहले तो परम यशस्वी सम्राट् इलानन्दन पुरूरवा उर्वशीके विरहसे अत्यन्त बेसुध हो गया था। पीछे शोक हट जानेपर उसे बड़ा वैराग्य हुआ और तब उसने यह गाथा गायी॥ ४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.26.4 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 871) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/26/4/