श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.26.4

एकादश स्कन्ध · अध्याय 26 · अथ षड्विंशोऽध्यायः

ऐलः सम्राडिमां गाथामगायत बृहच्छ्रवाः।

उर्वशीविरहान् मुह्यन् निर्विण्णः शोकसंयमे॥ ४

ailaḥ samrāḍimāṃ gāthāmagāyata bṛhacchravāḥ|

urvaśīvirahān muhyan nirviṇṇaḥ śokasaṃyame|| 4

अर्थ

उद्धवजी! पहले तो परम यशस्वी सम्राट् इलानन्दन पुरूरवा उर्वशीके विरहसे अत्यन्त बेसुध हो गया था। पीछे शोक हट जानेपर उसे बड़ा वैराग्य हुआ और तब उसने यह गाथा गायी॥ ४॥

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