श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.25.19

एकादश स्कन्ध · अध्याय 25 · अथ पञ्चविंशोऽध्यायः

एधमाने गुणे सत्त्वे देवानां बलमेधते।

असुराणां च रजसि तमस्युद्धव रक्षसाम्॥ १९

edhamāne guṇe sattve devānāṃ balamedhate|

asurāṇāṃ ca rajasi tamasyuddhava rakṣasām|| 19

अर्थ

उद्धवजी! सत्त्वगुणके बढ़नेपर देवताओंका, रजोगुणके बढ़नेपर असुरोंका और तमोगुणके बढ़नेपर राक्षसोंका बल बढ़ जाता है। (वृत्तियोंमें भी क्रमशः सत्त्वादि गुणोंकी अधिकता होनेपर देवत्व, असुरत्व और राक्षसत्व-प्रधान निवृत्ति, प्रवृत्ति अथवा मोहकी प्रधानता हो जाती है)॥ १९॥

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