श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.24.8

एकादश स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

अर्थस्तन्मात्रिकाज्जज्ञे तामसादिन्द्रियाणि च।

तैजसाद् देवता आसन्‍नेकादश च वैकृतात्॥ ८

arthastanmātrikājjajñe tāmasādindriyāṇi ca|

taijasād devatā āsannekādaśa ca vaikṛtāt|| 8

अर्थ

तामस अहंकारसे पंचतन्मात्राएँ और उनसे पाँच भूतोंकी उत्पत्ति हुई। तथा राजस अहंकारसे इन्द्रियाँ और सात्त्विक अहंकारसे इन्द्रियोंके अधिष्ठाता ग्यारह देवता* प्रकट हुए॥ ८॥

टिप्पणियाँ

  1. *

    पाँच ज्ञानेन्द्रिय, पाँच कर्मेन्द्रिय और एक मन—इस प्रकार ग्यारह इन्द्रियोंके अधिष्ठाता ग्यारह देवता हैं।

    (मुद्रित पृष्ठ 864)

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