उनमेंसे एक वस्तुको प्रकृति कहते हैं। उसीने जगत्में कार्य और कारणका रूप धारण किया है। दूसरी वस्तुको, जो ज्ञानस्वरूप है, पुरुष कहते हैं॥ ४॥
तयोरेकतरो ह्यर्थः प्रकृतिः सोभयात्मिका।
ज्ञानं त्वन्यतमो भावः पुरुषः सोऽभिधीयते॥ ४
उनमेंसे एक वस्तुको प्रकृति कहते हैं। उसीने जगत्में कार्य और कारणका रूप धारण किया है। दूसरी वस्तुको, जो ज्ञानस्वरूप है, पुरुष कहते हैं॥ ४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.24.4 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 864) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/24/4/