te'vyakte saṃpralīyante tat kāle līyate'vyaye|| 26
अर्थ
ज्ञानशक्ति और क्रियाशक्तिप्रधान महत्तत्त्व अपने कारण गुणोंमें लीन हो जाता है। गुण अव्यक्त प्रकृतिमें और प्रकृति अपने प्रेरक अविनाशी कालमें लीन हो जाती है॥ २६॥
स लीयते महान् स्वेषु गुणेषु गुणवत्तमः।
तेऽव्यक्ते संप्रलीयन्ते तत् काले लीयतेऽव्यये॥ २६
ज्ञानशक्ति और क्रियाशक्तिप्रधान महत्तत्त्व अपने कारण गुणोंमें लीन हो जाता है। गुण अव्यक्त प्रकृतिमें और प्रकृति अपने प्रेरक अविनाशी कालमें लीन हो जाती है॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.24.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 866) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/24/26/