॥ श्रीहरिः ॥
अप्सु प्रलीयते गन्ध आपश्च स्वगुणे रसे।
लीयते ज्योतिषि रसो ज्योती रूपे प्रलीयते॥ २३
apsu pralīyate gandha āpaśca svaguṇe rase|
līyate jyotiṣi raso jyotī rūpe pralīyate|| 23
अर्थ
गन्ध जलमें, जल अपने गुण रसमें, रस तेजमें और तेज रूपमें लीन हो जाता है॥ २३॥
अप्सु प्रलीयते गन्ध आपश्च स्वगुणे रसे।
लीयते ज्योतिषि रसो ज्योती रूपे प्रलीयते॥ २३
गन्ध जलमें, जल अपने गुण रसमें, रस तेजमें और तेज रूपमें लीन हो जाता है॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.24.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 866) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/24/23/