श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.24.13

एकादश स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

अधोऽसुराणां नागानां भूमेरोकोऽसृजत् प्रभुः।

त्रिलोक्यां गतयः सर्वाः कर्मणां त्रिगुणात्मनाम्॥ १३

adho'surāṇāṃ nāgānāṃ bhūmeroko'sṛjat prabhuḥ|

trilokyāṃ gatayaḥ sarvāḥ karmaṇāṃ triguṇātmanām|| 13

अर्थ

सृष्टिकार्यमें समर्थ ब्रह्माजीने असुर और नागोंके लिये पृथ्वीके नीचे अतल, वितल, सुतल आदि सात पाताल बनाये। इन्हीं तीनों लोकोंमें त्रिगुणात्मक कर्मोंके अनुसार विविध गतियाँ प्राप्त होती हैं॥ १३॥

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