श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.24.10

एकादश स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

तस्मिन्‍नहं समभवमण्डे सलिलसंस्थितौ।

मम नाभ्यामभूत् पद्मं विश्‍वाख्यं तत्र चात्मभूः॥ १०

tasminnahaṃ samabhavamaṇḍe salilasaṃsthitau|

mama nābhyāmabhūt padmaṃ viśvākhyaṃ tatra cātmabhūḥ|| 10

अर्थ

जब वह अण्ड जलमें स्थित हो गया, तब मैं नारायणरूपसे इसमें विराजमान हो गया। मेरी नाभिसे विश्‍वकमलकी उत्पत्ति हुई। उसीपर ब्रह्माका आविर्भाव हुआ॥ १०॥

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