श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.24.1

एकादश स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

सांख्ययोग

श्रीभगवानुवाच

अथ ते संप्रवक्ष्यामि सांख्यं पूर्वैर्विनिश्‍चितम्।

यद् विज्ञाय पुमान् सद्यो जह्याद् वैकल्पिकं भ्रमम्॥ १

atha te saṃpravakṣyāmi sāṃkhyaṃ pūrvairviniścitam|

yad vijñāya pumān sadyo jahyād vaikalpikaṃ bhramam|| 1

अर्थ

भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं—प्यारे उद्धव! अब मैं तुम्हें सांख्यशास्त्रका निर्णय सुनाता हूँ। प्राचीन कालके बड़े-बड़े ऋषि-मुनियोंने इसका निश्‍चय किया है। जब जीव इसे भलीभाँति समझ लेता है तो वह भेदबुद्धिमूलक सुख-दुःखादिरूप भ्रमका तत्काल त्याग कर देता है॥ १॥

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