श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.23.40

एकादश स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

इत्येके विहसन्त्येनमेके दुर्वातयन्ति च।

तं बबन्धुर्निरुरुधुर्यथा क्रीडनकं द्विजम्॥ ४०

ityeke vihasantyenameke durvātayanti ca|

taṃ babandhurnirurudhuryathā krīḍanakaṃ dvijam|| 40

अर्थ

कोई उस अवधूतकी हँसी उड़ाता, तो कोई उसपर अधोवायु छोड़ता। जैसे लोग तोता-मैना आदि पालतू पक्षियोंको बाँध लेते या पिंजड़ेमें बंद कर लेते हैं, वैसे ही उसे भी वे लोग बाँध देते और घरोंमें बंद कर देते॥ ४०॥

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