श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.23.37

एकादश स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

तर्जयन्त्यपरे वाग्भिः स्तेनोऽयमिति वादिनः।

बध्नन्ति रज्ज्वा तं केचिद् बध्यतां बध्यतामिति॥ ३७

tarjayantyapare vāgbhiḥ steno'yamiti vādinaḥ|

badhnanti rajjvā taṃ kecid badhyatāṃ badhyatāmiti|| 37

अर्थ

कोई उसे चोर कहकर डाँटने-डपटने लगता। कोई कहता ‘इसे बाँध लो, बाँध लो’ और फिर उसे रस्सीसे बाँधने लगते॥ ३७॥

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