pīṭhaṃ caike'kṣasūtraṃ ca kanthāṃ cīrāṇi kecana|| 34
अर्थ
कोई उसका दण्ड छीन लेता, तो कोई भिक्षापात्र ही झटक ले जाता। कोई कमण्डलु उठा ले जाता तो कोई आसन, रुद्राक्षमाला और कन्था ही लेकर भाग जाता। कोई तो उसकी लँगोटी और वस्त्रको ही इधर-उधर डाल देते॥ ३४॥
केचित्त्रिवेणुं जगृहुरेके पात्रं कमण्डलुम्।
पीठं चैकेऽक्षसूत्रं च कन्थां चीराणि केचन॥ ३४
कोई उसका दण्ड छीन लेता, तो कोई भिक्षापात्र ही झटक ले जाता। कोई कमण्डलु उठा ले जाता तो कोई आसन, रुद्राक्षमाला और कन्था ही लेकर भाग जाता। कोई तो उसकी लँगोटी और वस्त्रको ही इधर-उधर डाल देते॥ ३४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.23.34 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 859) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/23/34/