॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.22.59
उद्धव उवाच
यथैवमनुबुध्येयं वद नो वदतां वर।
सुदुःसहमिमं मन्ये आत्मन्यसदतिक्रमम्॥ ५९
yathaivamanubudhyeyaṃ vada no vadatāṃ vara|
suduḥsahamimaṃ manye ātmanyasadatikramam|| 59
अर्थ
उद्धवजीने कहा—भगवन्! आप समस्त वक्ताओंके शिरोमणि हैं। मैं इस दुर्जनोंसे किये गये तिरस्कारको अपने मनमें अत्यन्त असह्य समझता हूँ। अतः जैसे मैं इसको समझ सकूँ, आपका उपदेश जीवनमें धारण कर सकूँ, वैसे हमें बतलाइये॥ ५९॥