श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.2.39

एकादश स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

शृण्वन् सुभद्राणि रथांगपाणे-

र्जन्मानि कर्माणि च यानि लोके।

गीतानि नामानि तदर्थकानि

गायन् विलज्जो विचरेदसंगः॥ ३९

śṛṇvan subhadrāṇi rathāṃgapāṇe-

rjanmāni karmāṇi ca yāni loke|

gītāni nāmāni tadarthakāni

gāyan vilajjo vicaredasaṃgaḥ|| 39

अर्थ

संसारमें भगवान्‌के जन्मकी और लीलाकी बहुत-सी मंगलमयी कथाएँ प्रसिद्ध हैं। उनको सुनते रहना चाहिये। उन गुणों और लीलाओंका स्मरण दिलानेवाले भगवान्‌के बहुत-से नाम भी प्रसिद्ध हैं। लाज-संकोच छोड़कर उनका गान करते रहना चाहिये। इस प्रकार किसी भी व्यक्ति, वस्तु और स्थानमें आसक्ति न करके विचरण करते रहना चाहिये॥ ३९॥

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