upāsīnastatpadavīṃ lebhe vai janmabhistribhiḥ|| 18
अर्थ
राजर्षि भरतने सारी पृथ्वीका राज्यभोग किया, परन्तु अन्तमें इसे छोड़कर वनमें चले गये। वहाँ उन्होंने तपस्याके द्वारा भगवान्की उपासना की और तीन जन्मोंमें वे भगवान्को प्राप्त हुए॥ १८॥✎ 17241725
स भुक्तभोगां त्यक्त्वेमां निर्गतस्तपसा हरिम्।
उपासीनस्तत्पदवीं लेभे वै जन्मभिस्त्रिभिः॥ १८
राजर्षि भरतने सारी पृथ्वीका राज्यभोग किया, परन्तु अन्तमें इसे छोड़कर वनमें चले गये। वहाँ उन्होंने तपस्याके द्वारा भगवान्की उपासना की और तीन जन्मोंमें वे भगवान्को प्राप्त हुए॥ १८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.2.18 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 715) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/2/18/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)