श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.19.27

एकादश स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

धर्मो मद्भक्तिकृत् प्रोक्तो ज्ञानं चैकात्म्यदर्शनम्।

गुणेष्वसंगो वैराग्यमैश्‍वर्यं चाणिमादयः॥ २७

dharmo madbhaktikṛt prokto jñānaṃ caikātmyadarśanam|

guṇeṣvasaṃgo vairāgyamaiśvaryaṃ cāṇimādayaḥ|| 27

अर्थ

उद्धव! जिससे मेरी भक्ति हो, वही धर्म है; जिससे ब्रह्म और आत्माकी एकताका साक्षात्कार हो, वही ज्ञान है; विषयोंसे असंग—निर्लेप रहना ही वैराग्य है और अणिमादि सिद्धियाँ ही ऐश्‍वर्य हैं॥ २७॥

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