श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.18.3

एकादश स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

केशरोमनखश्मश्रुमलानि बिभृयाद् दतः।

न धावेदप्सु मज्जेत त्रिकालं स्थण्डिलेशयः॥ ३

keśaromanakhaśmaśrumalāni bibhṛyād dataḥ|

na dhāvedapsu majjeta trikālaṃ sthaṇḍileśayaḥ|| 3

अर्थ

केश, रोएँ, नख और मूँछ-दाढ़ीरूप शरीरके मलको हटावे नहीं। दातुन न करे। जलमें घुसकर त्रिकाल स्नान करे और धरतीपर ही पड़ रहे॥ ३॥

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