श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.16.8

एकादश स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

स तदा पुरुषव्याघ्रो युक्त्या मे प्रतिबोधितः।

अभ्यभाषत मामेवं यथा त्वं रणमूर्धनि॥ ८

sa tadā puruṣavyāghro yuktyā me pratibodhitaḥ|

abhyabhāṣata māmevaṃ yathā tvaṃ raṇamūrdhani|| 8

अर्थ

तब मैंने रणभूमिमें बहुत-सी युक्तियाँ देकर वीरशिरोमणि अर्जुनको समझाया था। उस समय अर्जुनने भी मुझसे यही प्रश्‍न किया था, जो तुम कर रहे हो॥ ८॥✎ 1748 1749

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1748 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: ज्ञान-शक्तिप्रधान → ज्ञानशक्तिप्रधान
  • #1749 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: क्रिया-शक्ति-प्रधान → क्रिया-शक्तिप्रधान

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