upāsīnāḥ prapadyante saṃsiddhiṃ tad vadasva me|| 3
अर्थ
बड़े-बड़े ऋषि-महर्षि आपके जिन रूपों और विभूतियोंकी परम भक्तिके साथ उपासना करके सिद्धि प्राप्त करते हैं, वह आप मुझसे कहिये॥ ३॥✎ 1747
येषु येषु च भावेषु भक्त्या त्वां परमर्षयः।
उपासीनाः प्रपद्यन्ते संसिद्धिं तद् वदस्व मे॥ ३
बड़े-बड़े ऋषि-महर्षि आपके जिन रूपों और विभूतियोंकी परम भक्तिके साथ उपासना करके सिद्धि प्राप्त करते हैं, वह आप मुझसे कहिये॥ ३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.16.3 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 809) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/16/3/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)