निष्पाप उद्धवजी! मैं नागराजोंमें शेषनाग, सींग और दाढ़वाले प्राणियोंमें उनका राजा सिंह, आश्रमोंमें संन्यास और वर्णोंमें ब्राह्मण हूँ॥ १९॥✎ 17481749
नागेन्द्राणामनन्तोऽहं मृगेन्द्रः शृंगिदंष्ट्रिणाम्।
आश्रमाणामहं तुर्यो वर्णानां प्रथमोऽनघ॥ १९
निष्पाप उद्धवजी! मैं नागराजोंमें शेषनाग, सींग और दाढ़वाले प्राणियोंमें उनका राजा सिंह, आश्रमोंमें संन्यास और वर्णोंमें ब्राह्मण हूँ॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.16.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 811) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/16/19/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)