tapatāṃ dyumatāṃ sūryaṃ manuṣyāṇāṃ ca bhūpatim|| 17
अर्थ
मैं गजराजोंमें ऐरावत, जलनिवासियोंमें उनका प्रभु वरुण, तपने और चमकनेवालोंमें सूर्य तथा मनुष्योंमें राजा हूँ॥ १७॥✎ 17481749
ऐरावतं गजेन्द्राणां यादसां वरुणं प्रभुम्।
तपतां द्युमतां सूर्यं मनुष्याणां च भूपतिम्॥ १७
मैं गजराजोंमें ऐरावत, जलनिवासियोंमें उनका प्रभु वरुण, तपने और चमकनेवालोंमें सूर्य तथा मनुष्योंमें राजा हूँ॥ १७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.16.17 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 811) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/16/17/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)