॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.15.7
स्वच्छन्दमृत्युर्देवानां सहक्रीडानुदर्शनम्।
यथासंकल्पसंसिद्धिराज्ञाप्रतिहतागतिः ॥ ७
svacchandamṛtyurdevānāṃ sahakrīḍānudarśanam|
yathāsaṃkalpasaṃsiddhirājñāpratihatāgatiḥ || 7
अर्थ
इनके अतिरिक्त और भी कई सिद्धियाँ हैं। शरीरमें भूख-प्यास आदि वेगोंका न होना, बहुत दूरकी वस्तु देख लेना और बहुत दूरकी बात सुन लेना, मनके साथ ही शरीरका उस स्थानपर पहुँच जाना, जो इच्छा हो वही रूप बना लेना; दूसरे शरीरमें प्रवेश करना, जब इच्छा हो तभी शरीर छोड़ना, अप्सराओंके साथ होनेवाली देवक्रीड़ाका दर्शन, संकल्पकी सिद्धि, सब जगह सबके द्वारा बिना ननु-नचके आज्ञापालन—ये दस सिद्धियाँ सत्त्वगुणके विशेष विकाससे होती हैं॥ ६-७॥