श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.14.20

एकादश स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

न साधयति मां योगो न सांख्यं धर्म उद्धव।

न स्वाध्यायस्तपस्त्यागो यथा भक्तिर्ममोर्जिता॥ २०

na sādhayati māṃ yogo na sāṃkhyaṃ dharma uddhava|

na svādhyāyastapastyāgo yathā bhaktirmamorjitā|| 20

अर्थ

उद्धव! योग-साधन, ज्ञान-विज्ञान, धर्मानुष्ठान, जप-पाठ और तप-त्याग मुझे प्राप्त करानेमें उतने समर्थ नहीं हैं, जितनी दिनों-दिन बढ़नेवाली अनन्य प्रेममयी मेरी भक्ति॥ २०॥✎ 1744 1745

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1744 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: खिल-खिलाकर → खिलखिलाकर
  • #1745 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: पिघल-कर → पिघलकर

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