श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.13.15

एकादश स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

उद्धव उवाच

यदा त्वं सनकादिभ्यो येन रूपेण केशव।

योगमादिष्टवानेतद् रूपमिच्छामि वेदितुम्॥ १५

yadā tvaṃ sanakādibhyo yena rūpeṇa keśava|

yogamādiṣṭavānetad rūpamicchāmi veditum|| 15

अर्थ

उद्धवजीने कहा—श्रीकृष्ण! आपने जिस समय जिस रूपसे, सनकादि परमर्षियोंको योगका आदेश दिया था, उस रूपको मैं जानना चाहता हूँ॥ १५॥

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