॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.13.10
रजोयुक्तस्य मनसः संकल्पः सविकल्पकः।
ततः कामो गुणध्यानाद् दुःसहः स्याद्धि दुर्मतेः॥ १०
rajoyuktasya manasaḥ saṃkalpaḥ savikalpakaḥ|
tataḥ kāmo guṇadhyānād duḥsahaḥ syāddhi durmateḥ|| 10
अर्थ
बस, जहाँ मनमें रजोगुणकी प्रधानता हुई कि उसमें संकल्प-विकल्पोंका ताँता बँध जाता है। अब वह विषयोंका चिन्तन करने लगता है और अपनी दुर्बुद्धिके कारण कामके फंदेमें फँस जाता है, जिससे फिर छुटकारा होना बहुत ही कठिन है॥ १०॥