श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.10.22

एकादश स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

अन्तरायैरविहतो यदि धर्मः स्वनुष्ठितः।

तेनापि निर्जितं स्थानं यथा गच्छति तच्छृणु॥ २२

antarāyairavihato yadi dharmaḥ svanuṣṭhitaḥ|

tenāpi nirjitaṃ sthānaṃ yathā gacchati tacchṛṇu|| 22

अर्थ

यदि यज्ञ-यागादि धर्म बिना किसी विघ्नके पूरा हो जाय तो उसके द्वारा जो स्वर्गादि लोक मिलते हैं, उनकी प्राप्तिका प्रकार मैं बतलाता हूँ, सुनो॥ २२॥

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