श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.1.9

एकादश स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

यन्‍निमित्तः स वै शापो यादृशो द्विजसत्तम।

कथमेकात्मनां भेद एतत् सर्वं वदस्व मे॥ ९

yannimittaḥ sa vai śāpo yādṛśo dvijasattama|

kathamekātmanāṃ bheda etat sarvaṃ vadasva me|| 9

अर्थ

भगवान्‌के परम प्रेमी विप्रवर! उस शापका कारण क्या था तथा क्या स्वरूप था? समस्त यदुवंशियोंके आत्मा, स्वामी और प्रियतम एकमात्र भगवान् श्रीकृष्ण ही थे; फिर उनमें फूट कैसे हुई? दूसरी दृष्टिसे देखें तो वे सब ऋषि अद्वैतदर्शी थे, फिर उनको ऐसी भेददृष्टि कैसे हुई? यह सब आप कृपा करके मुझे बतलाइये॥ ९॥

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