श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.90.9

दशम स्कन्ध · अध्याय 90 · अथ नवतितमोऽध्यायः

सिच्यमानोऽच्युतस्ताभिर्हसन्तीभिः स्म रेचकैः।

प्रतिसिञ्चन् विचिक्रीडे यक्षीभिर्यक्षराडिव॥ ९

sicyamāno'cyutastābhirhasantībhiḥ sma recakaiḥ|

pratisiñcan vicikrīḍe yakṣībhiryakṣarāḍiva|| 9

अर्थ

भगवान्‌की पत्‍नियाँ कभी-कभी हँसते-हँसते पिचकारियोंसे उन्हें भिगो देती थीं। वे भी उनको तर कर देते। इस प्रकार भगवान् अपनी पत्‍नियोंके साथ क्रीडा करते; मानो यक्षराज कुबेर यक्षिणियोंके साथ विहार कर रहे हों॥ ९॥

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