श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.90.40

दशम स्कन्ध · अध्याय 90 · अथ नवतितमोऽध्यायः

यदुवंशप्रसूतानां पुंसां विख्यातकर्मणाम्।

संख्या न शक्यते कर्तुमपि वर्षायुतैर्नृप॥ ४०

yaduvaṃśaprasūtānāṃ puṃsāṃ vikhyātakarmaṇām|

saṃkhyā na śakyate kartumapi varṣāyutairnṛpa|| 40

अर्थ

परीक्षित्! यदुवंशमें ऐसे-ऐसे यशस्वी और पराक्रमी पुरुष हुए हैं, जिनकी गिनती भी हजारों वर्षोंमें पूरी नहीं हो सकती॥ ४०॥

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