परीक्षित्! यदुवंशमें ऐसे-ऐसे यशस्वी और पराक्रमी पुरुष हुए हैं, जिनकी गिनती भी हजारों वर्षोंमें पूरी नहीं हो सकती॥ ४०॥
यदुवंशप्रसूतानां पुंसां विख्यातकर्मणाम्।
संख्या न शक्यते कर्तुमपि वर्षायुतैर्नृप॥ ४०
परीक्षित्! यदुवंशमें ऐसे-ऐसे यशस्वी और पराक्रमी पुरुष हुए हैं, जिनकी गिनती भी हजारों वर्षोंमें पूरी नहीं हो सकती॥ ४०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.90.40 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 707) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/90/40/