श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.90.38

दशम स्कन्ध · अध्याय 90 · अथ नवतितमोऽध्यायः

प्रतिबाहुरभूत्तस्मात् सुबाहुस्तस्य चात्मजः।

सुबाहोः शान्तसेनोऽभूच्छतसेनस्तु तत्सुतः॥ ३८

pratibāhurabhūttasmāt subāhustasya cātmajaḥ|

subāhoḥ śāntaseno'bhūcchatasenastu tatsutaḥ|| 38

अर्थ

वज्रके पुत्र हैं प्रतिबाहु, प्रतिबाहुके सुबाहु, सुबाहुके शान्तसेन और शान्तसेनके शतसेन॥ ३८॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें