श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.90.31

दशम स्कन्ध · अध्याय 90 · अथ नवतितमोऽध्यायः

एकैकस्यां दश दश कृष्णोऽजीजनदात्मजान्।

यावत्य आत्मनो भार्या अमोघगतिरीश्‍वरः॥ ३१

ekaikasyāṃ daśa daśa kṛṣṇo'jījanadātmajān|

yāvatya ātmano bhāryā amoghagatirīśvaraḥ|| 31

अर्थ

उनके अतिरिक्त भगवान् श्रीकृष्णकी और जितनी पत्‍नियाँ थीं, उनसे भी प्रत्येकके दस-दस पुत्र उत्पन्‍न किये। यह कोई आश्‍चर्यकी बात नहीं है। क्योंकि भगवान् सर्वशक्तिमान् और सत्यसंकल्प हैं॥ ३१॥

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