परीक्षित्! भगवान्ने और भी ऐसी अनेकों ऐश्वर्य और वीरतासे परिपूर्ण लीलाएँ कीं। लोकदृष्टिमें साधारण लोगोंके समान सांसारिक विषयोंका भोग किया और बड़े-बड़े महाराजाओंके समान श्रेष्ठ-श्रेष्ठ यज्ञ किये॥ ६४॥
इतीदृशान्यनेकानि वीर्याणीह प्रदर्शयन्।
बुभुजे विषयान् ग्राम्यानीजे चात्यूर्जितैर्मखैः॥ ६४
परीक्षित्! भगवान्ने और भी ऐसी अनेकों ऐश्वर्य और वीरतासे परिपूर्ण लीलाएँ कीं। लोकदृष्टिमें साधारण लोगोंके समान सांसारिक विषयोंका भोग किया और बड़े-बड़े महाराजाओंके समान श्रेष्ठ-श्रेष्ठ यज्ञ किये॥ ६४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.89.64 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 700) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/89/64/