श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.89.48

दशम स्कन्ध · अध्याय 89 · अथैकोननवतितमोऽध्यायः

सप्त द्वीपान् सप्त सिन्धून् सप्तसप्तगिरीनथ।

लोकालोकं तथातीत्य विवेश सुमहत्तमः॥ ४८

sapta dvīpān sapta sindhūn saptasaptagirīnatha|

lokālokaṃ tathātītya viveśa sumahattamaḥ|| 48

अर्थ

उन्होंने सात-सात पर्वतोंवाले सात द्वीप, सात समुद्र और लोकालोक-पर्वतको लाँघकर घोर अन्धकारमें प्रवेश किया॥ ४८॥

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